Friday, August 24, 2012

कृति - अंजलि गुप्ता
व्याख्या - नीतू गुप्ता, आशुतोष गुप्ता
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एक बार की बात हैं, सोने की चिड़िया नाम के देश के एक छोटे से शहर में रहने आयीं एक प्यारी सी लड़की। उसका नाम दिवाली थी। दिवाली रोज सुबह उठ के तैयार हो स्कूल जाती व मन लगा के पढ़ती। पर वो अकेला महसूस करती थी, आस पास में कोई सहेली ही नहीं थी। फिर एक दिन उसने देखा पार्क में हरे रंग के झुमके व् शरारा पहने एक सुंदर सी लड़की खेल रही हैं। दिवाली का भी मन हुआ उसके साथ खेलने का तो उसने पुछा तुम्हारा नाम क्या हैं ? शरारा पहने लड़की ने बताया मेरा नाम ईद हैं। दिवाली ने  कहाँ मेरी सहेली बनोगी,  तो ईद ने भी झट से हाँ करदी। फिर तो दोनों पक्की सहेलियां बन गयी। रोज साथ में पढ़ती व खेलती । छुट्टी वाले दिन पार्क में पिकनिक होती, दिवाली हलवा पूरी लाती तो ईद माँ से मज़ेदार बिरयानी बनवा लती। दोनों झटपट सब ख़तम कर देते। दिवाली चटपट बिरयानी खाती तो ईद पूरिया। दिन बीतने लगे। पड़ोस में एक नया परिवार रहने आया। उनका एक बेटा था सतगुरु नाम का। उसने खडकी से देखा पार्क में तो खेलने का मन होने लगा। सतरंगी रंग का कुरता और पग पहने हुए हिलता हुआ पार्क में जा पहुंचा जहाँ दिवाली व ईद खेल रहे थे। दोनों ने झट से उससे दोस्ती कर अपनी टोली में मिला लियां। अब तो गुरु सबके लियें रोज शाम को माँ से शरबत बनवा के लेके आता व तीनो मिलके पीते। दिन सपनो से सुहाने बीतने लगे। तीनो क्लास में पढ़ रहे थे, घंटी बजी तो खाने के लिए माँ का दिया हुआ टिफिन खोला खाने के लिए। गुरु ने देखा एक बच्चा रो रहन था, उसने पुछा क्या हुआ। वो बोला माँ बीमार हैं टिफिन नहीं दे पायीं और भूक लगी हैं बस थोडा सा केक दिया हैं कल का। गुरु झट से हाथ पकड़ के अपने दोस्तों के पास ले आया और तीनो ने अपने टिफिन उसकी तरफ बढ़ा दिया। तीनो ने मिलके पूरी, बिरयानी खाई और शरबत पीकर केक खाया। गुरु के पूछने पर उसने अपना नाम क्रिसमस बताया। अब तो चारो पक्के मित्र बन गए और बचपन हंसी खुसी परियों की कहानियो सा बीतने लगा।