Monday, May 26, 2008

बारिश

तीरों की बारिश ख़त्म करो यारो.......
बहुत लग चुके है ,पैबंद दामन पे अपने
अब तो तीरों की बारिश ख़त्म करो यारों,
दो घड़ी पास बैठो मोहब्बत की बात करो यारो.

जिनके कहने पर हमने खून वहाया तूने मेरा
और मैने तेरा घर जलाया,
खादीं मे छुपे उन शैतानों को पहचनो यारों
दो घड़ी पास बैठो मोहब्बत की बात करो यारो.

मेरे घर मे नन्हे बच्चे है, तो तेरे घर मे भी है बुडी माँ
ज़िम्मेदारी मुझ पर भी है ज़िम्मेदारी तुझ पर भी
तो क्यो ना अपनो की बात करे यारों
दो घड़ी पास बैठो मोहब्बत की बात करो यारो.

ना मेरा ईश्वर तुझसे खफा है, ना तेरा अल्लाह
मुझसे जुदादिल से पुकारो दोनो मिलेंगें यहाँ,
चलो शिर्डी मे सर झुकाएँ और दरगाह मे दुआ माँग आएँ यारो
दो घड़ी पास बैठो मोहब्बत की बात करो यारो.

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