Wednesday, June 4, 2008

हाल फिलहाल एक हुआ तमाशा,
दुनिया वालों दो ध्यान जरा सा
वीश्वा में नए अजूबे चुने गए,

एस एम एस से वोटिंग किए गए
करोडो का हुआ वारा - न्यारा,
देकर वास्ता इज्जत का यारा
भोली जनता को बनाया गया,
ताज के नाम पर फंसाया गया


मीडिया भी बेफकूफ बन गई,
वह भी ताज के पीछे पड़ गयी
जनता से सबने गुहार लगाई,
जितने चाहो वोट दो भाई

वोट के नाम पर खूब कमाया,
भीख मांगने का नया तरीका पाया

अरे भाई! ताज कहाँ अजूबा है?
वहाँ तो सोई बस एक महबूबा है!


आज के युग में कितनी तरक्की है,
ट्रेनें, हवाई-जहाज, सड़क पक्की है
रॉकेट, मिसाईल, कारें, सितारा होटल हैं,
खुलती दिन रात जहाँ शैंपेन बोटल हैं


आओ दिखाता हूँ मै आपको सच्ची अजूबे,
प्रगति के दौर के ये हैं असली अजूबे।

विश्व का प्रथम अजूबा - ध्यान दें!
मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर कर दिखला दें!
कोई माई का लाल साबित कर दे,
इससे बड़ा अजूबा दुनिया में दिखा दे


आओ दिखाता हूँ मैं आपको सच्ची अजूबे,
प्रगति के दौर के ये हैं असली अजूबे
दूसरा अजूबा भी हमारे देश में,
नजरें उठा कर देख लो किसी भी शहर गली में
कचरे के डब्बों से खाना ढ़ूंढ़ता आदमी,
उसी को खा कर अपनी भूख मिटाता आदमी


आओ दिखाता हूँ मै आपको सच्ची अजूबे,
प्रगति के दौर के ये हैं असली अजूबे
तीसरा अजूबा - कीड़ों सा रेंगता आदमी,
स्लम, फुटपाथ, ट्रैक पर जीवन बिताता आदमी
सडको पर सुबह, लोटा लेकर बैठा आदमी,
देखिए अजूबा, मजबूर कितना आदमी


Aur bhi कितने अजूबे हैं हमारे देश में,
एक एक कर गिनाना है न मेरे बस में
एक एक कर गिनाना है न मेरे बस में॥

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